बेऔलाद मर्दों और औरतों के लिए ज़रूरी हिदायात*0️⃣3️⃣
*🌹ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🌹*
*💚الصــلوة والسلام عليك يارسول الله صلی الله عليه وسلم💚*
*बेऔलाद मर्दों और औरतों के लिए ज़रूरी हिदायात*
*औलाद दुनिया में अल्लाह तआ़ला की बहुत बड़ी नेमत है लिहाज़ा जिसको अल्लाह तआ़ला यह नेमत अता फ़रमाये उसको चाहिए कि वह ख़ुदा ए तआ़ला का शुक्र अदा करे और अगर न दे तो सब्र करे, मगर आजकल कुछ मर्द और औरतें औलाद न होने की वजह से परेशान रहते हैं और इस कमी को ज़्यादा महसूस करते हैं हालाँकि यह अहले ईमान की शान नहीं मोमिन को दुनिया और उसकी नेमतों के हासिल होने की ज़्यादा फ़िक्र नहीं करना चाहिए ज़्यादा फ़िक्र व ग़म आख़िरत का होना चाहिए, अगर आपने अपनी आख़िरत सुधार ली तो दुनिया की किसी नेमत के न पाने का ज़्यादा ग़म नहीं करना चाहिए औलाद अल्लाह की नेमत ज़रूर है लेकिन समझ वालों के लिए यह बात भी क़ाबिले ग़ौर है कि माल और औलाद को अल्लाह जल्ला शानुहु ने अपने क़ुरआन में दुनिया की रौनक़ फ़रमाया आख़िरत की नहीं। फ़रमाता है*
*اَلمَـالُ وَالبَنُـونَ زِينَـةُ الحَيٰوةِ الدُّنيَـا* الخ الایۃ
*माल और बेटे दुनियवी ज़िन्दगी का सिंगार हैं और बाक़ी रहने वाली अच्छी बातें हैं, उनका सवाब तुम्हारे रब के यहाँ बेहतर और वो उम्मीद में सबसे भली*
📚(सूरह कहफ़ पारा 16 रुकूअ़ 18)
*क़ुरआने करीम में माल और औलाद को फ़ितना यअ़नी आज़माइश भी कहा गया है जिसका मतलब यह है कि इन चीज़ों को हासिल करके अगर ख़ुदा व रसूल का हक़ भी अदा करता रहा तब तो ठीक, और माल व औलाद की मुहब्बत में अल्लाह व रसूल को भूल गया हराम व हलाल का फ़र्क़ खो बैठा तो यह निहायत बुरी चीजें हैं अलबत्ता नेक औलाद आख़िरत का भी सरमाया है लेकिन आने वाले ज़माने में औलाद के नेक होने की उम्मीदें काफ़ी कम हो गई हैं*
*ख़ुदा ए तआ़ला के महबूब बन्दों यअ़नी अल्लाह वालों में भी ऐसे बहुत से लोग हुए हैं जिनके औलाद न थी सरकारे दो आलम हज़रत रसूले पाक मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम की सबसे प्यारी बीवी सय्यिदा आइशा सिद्दीक़ा रदियल्लाहु तआ़ला अन्हा के भी कोई औलाद न थी, बल्कि हुज़ूर की ग्यारह बीवियाँ थीं जिनमें से आपकी औलाद सिर्फ़ दो से हुईं सहाबा किराम में हज़रते सय्यिदना बिलाल हबशी रदियल्लाहु अन्हु भी बेऔलाद थे*
*हमारे कुछ भाई और बहनें बेऔलाद होने की वजह से हर वक़्त कुढ़ते रहते हैं और ज़िन्दगी भर दवा और दुआ तावीज़ कराते रहते हैं, और लूट खसोट मचाने वाले कुछ डाक्टर व हकीम और करने धरने वाले कठमुल्ले और मियाँ फ़क़ीर, उनकी कमज़ोरी से ख़ूब फ़ायदे उठाते चक्कर पर चक्कर लगवाते यहाँ तक कि उन्हें बरबाद कर देते हैं.!*
📚(ग़लत फ़हमियां और उनकी इस्लाह सफ़ह 126 127 128)
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