मेराज़ की रात को जिबराईल अमीन नबी करीम सल्लल्लाहु तआला अलैही वसल्लम को अम्बिया ए किराम से तआरुफ़ क्यों करा रहे थे
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*🥀 मेराज़ की रात को जिबराईल अमीन नबी करीम सल्लल्लाहु तआला अलैही वसल्लम को अम्बिया ए किराम से तआरुफ़ क्यों करा रहे थे 🥀*
*मैसेज नम्बर-: 1️⃣5️⃣*
💖हमारे नबी करीम सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम अल्लाह तआला की मुलाक़ात की तमन्ना में क़ामिल तौर पर इस्तिरगराक में थे सिर्फ मक़सद अज़ीम रब का मुशाहिदा करना था आप मख़लूक़ की तरफ तवज्जोह करने से ग़ाफ़िल थे ! जैसे कि रब तआला ने फरमाया:
*आंख न किसी की तरफ फिरी और न हद से बढ़ी*
🔅यह आपके इस्तिगराक़ ताम की तरफ़ क़ामिल इशारा है इसी वजह से हर मकाम पर जिबराईल अलैहिस्सलाम आपको मुतवज्जेह करते रहे कि यह फलां नबी हैं आप इनको सलाम करें !
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*“हुज़ूर अलैहिस्सलाम का मेराज़ जागते हुए था”*
✨अल्लामा तैयबी रहमतुल्लाह अलैही ने फरमाया की हम ने बुख़ारी और तिर्मिज़ी की रिवायत जो इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हुमा से मरवी है उसे ज़िक़्र की की अल्लाह तआला के इस इरशाद में की:
*और हमने न किया वह दिखाना जो तुम्हें दिखाया था मगर लोगों की आजमाइश*
यानी आपको हालाते बेदारी में मेराज कराके लोगों के लिए आजमाइश बनाया कि कौन ईमान लाता और कौन नही !
💫रुया से मुराद आंख है (ख़्वाब देखना मुराद नही) जो रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम को दिखाया गया है यह वह सैर की रात है जिसका ज़िक़्र कुरान पाक में हुआ कि आपको मस्जिद हराम से अक़्सा(बैतूल मुक़द्दस) तक कि सैर कराई गई !
🕋रब तआला ने हुज़ूर की मेराज का ज़िक्र करते हुए फ़रमाया “इसरा बिअब्दिही” जो इस पर दलालत कर रहा है कि यह वाक़या बेदारी का था और आपको जिस्मानी तौर पर हुई क्योंकि अब्द रूह और जिस्म दोनों के मजमुआ पर बोला जाता है अगर ख़्वाब का वाक़या होता तो “इसरा बिरूही अब्दिही” कहा जाता ! और कबीर में अल्लामा राज़ी ने भी ज़िक़्र किया है !
*📚(तज़कीरतुल अम्बिया, सफा 526, 527)*
*👉🏻नोट::-* पोस्ट को खूब आम करें, बहुत अहम इल्म है साथ ही अगली पोस्ट पढे *“सैयदुल अम्बिया अलैहिस्सलाम और मूसा अलैहिस्सलाम के कलाम में फ़र्क़”*
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