फ़र्ज़ और नफ्ली सदक़ा में फ़र्क़ क्यों
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*🥀 फ़र्ज़ और नफ्ली सदक़ा में फ़र्क़ क्यों 🥀*
*मैसेज नम्बर-: 1️⃣2️⃣*
🎁नफ्ली सदक़ात और वक़्फ़ से आले रसूल पर माल ख़र्च करना जायज़ है, फ़र्ज़ जायज़ नही क्योंकि फ़र्ज़ सदक़ा करने वाला अपने जिम्मे लाज़िम हक़ को अदा करके अपने आपको पाकिज़ा करता है और जो माल बतौर सदक़ा अदा करता है व मुस्तअमल पानी की तरह हो जाता है जिसमें पाक करने की सलाहियत ख़त्म ही जाती है लेकिन नफ्ली सदक़ा करने वाला अपनी खुशी से वह माल देता है जो उसके जिम्मे लाज़िम नही होता है ! लिहाजा वह मैल कुचैल की हैसियत नही रखता जिस तरह एक बा वुज़ू शख़्श पानी को ठंडक हासिल करने के लिए इस्तमाल करे उसके जिस्म पर जाहिर नापाकी भी न हो वह पानी अपनी असली हालत पर बरकरार रहता है पाक करने की इसमें सलाहियत होती है ! इसी तरह यह माल भी पाक व साफ़ होता है ! मैल कुचैल से पाक होता है, आले रसूल की शान के लायक होता है !
*📚(तज़किरतुल अम्बिया, सफा 501)*
*👉🏻नोट::-* पोस्ट को खूब आम करें, बहुत अहम इल्म है साथ ही अगली पोस्ट पढे *“अम्बिया ए किराम अलैहिस्सलाम एहतलाम से महफूज़”*
_एहतलाम= Night Faal,_
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