एक एतराज का जवाब

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*🥀 एक एतराज का जवाब 🥀*



*मैसेज नम्बर-: 2️⃣*

*❓एतराज़::-* _हदीस शरीफ़ में तो आता है की नबी करीम सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम ने फरमाया हम इब्राहिम अलैहिस्सलाम से शक करने में ज़्यादा हक़ रखते हैं! इससे पता चला कि आपने मुर्दों को ज़िंदा करने का सवाल शक़ को वजह से किया था यानी आपको यक़ीन नही था !_
*➡जवाब::-* हदीस पाक के तर्जुमा और समझने में लोग ग़लती करते हैं हदीस पाक यह मतलब नही जो एतराज करने वाले पेश करते हैं हदीस पाक के तर्जुमा और वज़ाहत की तरफ तवज्जोह करें मतलब ख़ुद वाज़ेह हो जाएगा !
_हज़रत अबु हुरैरह रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी है बेशक़ नबी क़रीम सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम ने फरमाया अगर इब्राहिम अलैहिस्सलाम ने शक किया होता तो हम बनिस्बत इब्राहिम अलैहिस्सलाम के शक करने का ज़्यादा हक़ रखते_
👆🏼इस हदीस पाक यह मतलब नही की हुज़ूर सल्ललाहु तआला अलैही वसल्लम ने यह फ़रमाया की हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अल्लाह तआला के मुर्दों को ज़िंदा करने में किया था और हमे उनकी निस्बत ज़्यादा शक है बल्कि इस हदीस पाक का तर्जुमा जो बयान किया है इसी से मतलब वाज़ेह हो रहा है ! ताहम ज़्यादती वज़ाहत के लिए अल्लामा नुवी रहमतुल्लाह अलैही ने इस हदीस पाक की शरह बयान की है इससे एक कॉल बयान किया जा रहा है, आप फ़रमाते है नबी क़रीम सल्लल्लाहु तआला अलैही वस्सलम के इस इरशाद: ‛‛अगर इब्राहिम अलैहिस्सलाम ने शक किया होता तो हम बनिस्बत इब्राहिम अलैहिस्सलाम के शक करने का ज़्यादा हक़ रखते के मायने बयान करने में उलमा के बहुत अक़वाल हैं लेकिन सबसे हसीन और सहीह कौल वह है जो इमाम अबू इब्राहिम मज़नी और उलमा की कई जमाअतों ने बयान फ़रमाया वह यह है !’’
_इस हदीस पाक का मतलब यह कि इब्राहिम अलैहिस्सलाम का शक करना महाल है अगर अल्लाह तआला के मुर्दों को ज़िंदा करने में अम्बिया ए किराम अलैहिस्सलाम से शक वाक़ए हो सकता तो बनिस्बत इब्राहिम अलैहिस्सलाम के शक करने में मैं ज़्यादा हक़ रखता और तहक़ीक़ तुम्हे यकीनन मालूम है कि मुझे मुर्दों को जिंदा करने में कोई शक नही तुम्हें यकीनन इस अमर का भी इल्म होना चाहिए कि बेशक़ इब्राहिम अलैहिस्सलाम को इस मे कोई शक नही था !_
✨ख़याल रहे कि इस हदीस पाक में नबी क़रीम सल्लल्लाहु तआला अलैही वसल्लम ने हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की फ़ज़ीलत बयान की और इज़्ज़ व इन्किसारी से अपने आपको उनसे कम मर्तबा ब्यान किया वरना दूसरे मकाम पर हक़ीक़त बयान करते हुए तमाम कायनात पर अपनी फ़ज़ीलत भी बयान की है !

*📚[तज़किरतुल अम्बिया, सफा 96, 97]*

_*👉🏻नोट::-* पोस्ट को खूब आम करें, बहुत अहम इल्म है साथ ही अगली पोस्ट पढें *"तमाम जानवरो में परिंदों का ही इंतखाब क्यों, मुर्दों को जिंदा करने का मंजर मुशाहदा करने में !*_



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