हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने मुर्दों को जिंदा करने का सवाल क्यों किया

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*🥀 हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने मुर्दों को जिंदा करने का सवाल क्यों किया 🥀*



*मैसेज नम्बर-: 1⃣*

_इमाम राजी रहमतुल्लाह अलैही ने इसकी सत्रह वजूह(कारण) बयान फरमाई हैं लेकिन अल्लामा नुवी रहमतुल्लाह अलैही ने चार के मुताल्लिक बयान फ़रमाया की यह ज़ाहिर और वाज़ेह हैं और बाकी वज़ूह ग़ैर ज़रूरी हैं !_
*पहली वजह::-* आपको इल्म इस्तिदलाली हासिल था अब आप मुर्दों को ज़िंदा करने की कैफियत का मुशाहिदा करना चाहते थे ताकि इल्म ज़रूरी बदीही भी हासिल हो जाये ! इसलिए की इमाम अबू मंसूर रहमतुल्लाहि अलैही का मज़हब यह है कि इल्म इस्तिदलाली में कभी शकूक वाकेय होते हैं लेकिन इल्म ज़रूरी शकूक से पाक होता है जो इल्म मुशाहिदा से अयायन हासिल हो वह ज़रूरी होता है !
ख़्याल रहे कि ख़ुद नबी के लिए इल्म इस्तिदलाली या ज़रूरी में फ़र्क़ नही होता क्योंकि नबी का इल्म शक से पाक होता है अलबत्ता सवाल करने की वजह यह थी कि किसी को भी यह कहने का हक़ न हो कि तुमने तो मुर्दों को जिंदा होते देखा ही नही तुम्हारे इल्म पर कैसे यकीन किया जाए !!
*दूसरी वजह::-* आप यह जानना चाहते थे कि मेरा मर्तबा अल्लाहः के नज़दीक क्या है ? और मेरी दुआ कि क़बूलियत का क्या मक़ाम है इस सूरत में मतलब यह होगा क्या तुम्हें यकीन नही तुम्हारा मर्तबा मेरे नज़दीक अज़ीम है तुम मेरे पसंदीदा हो और तुम मेरे खलील हो !
*तीसरी वजह::-* आपको पहले भी शक नही था आपने सवाल इस लिए किया ताकि यकीन की तरफ़ तरक्की हो जाये क्योंकि इन दोनों में बहुत बड़ा फ़र्क़ है इसलिए कि ऐनुल यकीन मुशाहिदा के बाद हासिल होता है लेकिन इलमुल यक़ीन में मुशाहिदा की जरूरत नही !
*चौथी वजह::-* जब आपने मुश्रिकिन पर यह दलील क़ायम फरमाई मेरा रब वह है जो ज़िंदा करता है और मारता है ! फिर आपने अल्लाह तआला से अर्ज़ किया ए अल्लाह तू किस तरह मुर्दों को ज़िंदा करता है ? यानी उनको मेरे सामने ज़िंदा कर मैं देखूं ताकि मेरी दलील काफिरों पर ज़ाहिर हो जाए !!

*📚[तज़किरतुल अम्बिया, सफा 95, 96]*



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