चालीस(40) के अदद में हिकमत
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*🥀 चालीस(40) के अदद में हिकमत 🥀*
*मैसेज नम्बर-: 9️⃣*
🌻मूसा अलैहिस्सलाम को चालीस दिनों के बाद तौरात अता की गई कि आप चालीस दिन दुनिया वालों से अलग थलग होकर अल्लाह तआला की याद में मशगूल रहे इस तरह उसके ज़िक़्र व फ़िक़्र से आपके क़ल्ब व रूह को एक ख़ास क़िस्म की क़ुव्वत हासिल हो जाये ! जो इस अज़ीम बोझ को उठाने के क़ाबिल हो जाये !
💡बेशक़ चालीस को एक खुसूसियत हासिल है ! इसी वजह से अम्बिया किराम को 40[चालीस] साल की उम्र में नुबूवत के एलान का हुक़्म दिया जाता रहा ! उनसे रब तआला का कलाम बजरिये वही इसी उम्र में हुआ ! फिर औलिया ए एज़ाम का भी यही मामूल है कि यह चिल्ला कशी करते हैं यानी चालीस[40] दिन तक दुनिया से अलग थलग रहकर अल्लाह तआला की याद में मशगूल होते हैं ! जिससे उनमे हिकमत और नूर के चश्में फुट पड़ते ! रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैही वसल्लम का इरशाद ए गिरामी है कि जो शख़्श 40[चालीस] सुबह ख़ुलूस से दुनिया से अलग थलग हो कर अल्लाह तआला को याद करता है तो उसके दिल से ज़ुबान में हिकमत के चश्में नमूदार हो जाते हैं !
💫काश लोगों को यह समझ आ जाये कि 40[चालीस] दिन तक फोत शुदा के लिए कुरानख़्वानी का एहतमाम करते रहना, फिर चालीस[40] पर इसके लिए इज़तमाई दुआ कितनी मक़बूलियत का सबब होगी ! ख़ैर जिस बदकिस्मत के लिए दुआ का एहतमाम नही किया जाता हमे उनसे झगड़ने की जरूरत नही !
*📚(तज़किरतुल अम्बिया, सफा 315, 316)*
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