सर्दी से कांपते हुए जिस्म पर चादर डालना कब्रो और मजारो पर चादर डालने से लाखो दर्जा बेहतर है
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*🥀 सर्दी से कांपते हुए जिस्म पर चादर डालना कब्रो और मजारो पर चादर डालने से लाखो दर्जा बेहतर है 🥀*
✏️ जैसे ही सर्दी का मौसम शुरू होता है वैसे ही किसी मौसमी चीज़ की तरह इस तरह की पोस्टे भी सोशल मीडिया पर तैरने लगती हैं जिन्हें दिन रात कॉपी पेस्ट करके आगे बढ़ाया जाता है। इन पोस्टों का सिर्फ एक मकसद होता है की किसी भी तरह अल्लाह के औलिया के मजारों को टारगेट किया जाए आइए बताता हुं कैसे।
❤🩹 तो पहली बात तो ये की शायद इनके हिसाब से सर्दी में ही गरीब का तन ढकने की जरूरत होती है बाकी गर्मी में वो नंगा घूम सकता है। लेकिन ऐसी पोस्टें करने वालों को आज मैं सच का आईना दिखाने वाला हुं।
🌹आज लगभग हर मुसलमान के घर में जितने लोग होते हैं उतने मोबाइल होते हैं जिनके हर महीने हज़ारों रुपए के रिचार्ज कराए जाते हैं और मोबाइल की कीमत लगभग 8 हज़ार से लेकर 20, 50, हज़ार या 1 लाख से भी ऊपर हो सकती है। भले कुछ हो जाए लेकिन रिचार्ज ज़रूर होना चाहिए उसके बाद रिचार्ज करा कर यूट्यूब पर फिल्मे, इंस्टाग्राम रील्स, टिक टोक और हॉटस्टार पर मैच के वीडियो बड़े चाव से देखे जाते हैं ऊपर से नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम वीडियो का सब्सक्रिप्शन चार्ज अलग से बड़ी खुशी से देते हैं। लेकिन यहां किसी के बदन पे चादर डालने का ख्याल बिलकुल नहीं आता क्योंकि ये सब चीजें शायद मजार पर डाली गई 10, 50 या 100 रुपए की चादर से सस्ती होती होंगी
💖अरे भाई 2 हज़ार के मोबाइल से भी बात हो सकती है और घर में एक या 2 मोबाइल से भी काम चल सकता है फिर इतनी फिजूल खर्ची क्यों
❣️अब दूसरी बात पर आते हैं किसी भी सिनेमा हाल चले जाइए मुसलमानो की अच्छी खांसी तादाद आपको वहां मिलेगी जहां हजारों रुपए के टिकट खरीद कर फिल्म देखने आते हैं लेकिन इस फिजूल खर्ची पर कोई ज्ञान देता नही दिखेगा। ना जाने कितनों के घर में टीवी है हर महीन 500 से हज़ार रुपए केबल पर खर्च कर दिए जाते हैं लेकिन शायद ये फिजूल खर्ची नही हैं
💓 आज कल हर किसी को घूमने जाने का बड़ा शौक है, कभी नैनीताल, कभी शिमला, कभी मनाली, कभी लद्दाख, कभी कश्मीर तो कोई मुझे बताए क्या ये फिजूल खर्ची नही है इस पर आपने बात की कभी
🌹लोगों की अलमारी पहले की कपड़ों से भरी पड़ी हैं फिर भी हर हफ्ते या महीने अपने लिए नए कपड़े, जूते लाते दिखते हैं, बाजारों की भीड़ से अंदाज़ा लगाया जा सकता है। उन्ही बाजारों मैं गरीब मांगने वाले भी होते हैं और जब भी जाओ वो लोग वहीं मांगते मिलते हैं क्या उनको कभी एक कपड़ा खरीद के दिया किसी ने इस्लाम तो कम से कम मैं गुज़ारा करने को कहता है फिर ये महंगे कपड़ों के शोक क्यों क्या ये फिजूल खर्ची नही है
📝 बड़े बड़े और महंगे से महंगे रेस्तरां में खाना एक नया ट्रेंड बन गया है पूरी की पूरी फैमिली जाती हैं खाने के लिए क्या ये फिजूल खर्ची नही जहां 10 रुपए की चीज के पूरे 100 रुपए खुशी खुशी देकर आते हो और साथ मैं टिप भी क्या कभी किसी गरीब को साथ लेकर गए खाना खिलाने के लिए वहां
❤🩹 महंगी मोटरसाइकिल, बड़ी बड़ी गाडियां उन मैं बैठकर रोज़ दिखावा करने हुक्का पीने जाना या किस नाच गाने वाले क्लब में जाकर अय्याशी करना और शादियों में हो रहे फिजूल खर्च इस सबकी तो मैं बात ही नही कर रहा क्योंकि आर्टिकल ज़्यादा लंबा खिंच जायेगा।
💖 खैर और भी बहुत कुछ है कहने के लिए पर आर्टिकल लंबा हो जायेगा इसलिए यही कहूंगा कि सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से और मजारों को निशाना बनाने से कुछ नही होगा ऐसा करके आप सिर्फ गैर मुस्लिमों को मौका दोगे बोलने का और आप ऐसा लिखते हैं सिर्फ इसलिए क्योंकि आपको मजार निशाने पर लेने हैं और कोई वजह नहीं है।
❤🩹में ये नही कहता की आपने कितना किया कितने लोगों के बदन ढके कितने भूकों को खाना खिलाया पर जनाब ये घाटियां सोच दिमाग से निकालिए और अमल पर ध्यान दीजिए और एक बार जाकर देखिए मजारों पर वहां हर रोज़ हजारों भूखों का पेट भरा जाता है अल्हमदुलिल्लाह और किसी पर उंगली उठाने से पहले अपने गिरेबान में ज़रूर झांका कीजिए नही तो दुनिया में भी पकड़ होगी और आखिरत में भी।
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*🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*
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